Guzarish
गुल-कदों में महकती सी दिल-कशी का ख़्वाब है
नूर का ये शामियाना ख़ूब है, नायाब है
नाज़नीं ने रूह को नज़रों से रौशन कर दिया
मेहरबानी शुक्रिया, तस्लीम है, आदाब है
ख़्वाब-गाहों से हो चुकी है रवानगी
अभी बादलों पे छाएगी दीवानगी
ख़्वाब-गाहों से हो चुकी है रवानगी
अभी बादलों पे छाएगी दीवानगी
हमें चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
कोई बच नहीं पाएगा शबाब से
आज आए हैं हुज़ूर बे-नक़ाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
बात हुई है बहारों की गुलाब से
वाक़फ़ियतें भी हो गईं शादाब से
वो तो माँगते हैं शोख़ियाँ जनाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
आशिक़ाना सा मिज़ाज है अदाओं में
वो मिलाएँगे सुरूर भी फ़िज़ाओं में
आशिक़ाना सा मिज़ाज है अदाओं में
वो मिलाएँगे सुरूर भी फ़िज़ाओं में
वो मिलाएँगे सुरूर भी फ़िज़ाओं में
कि नशा अखियों में ज़्यादा है शराब से
अखियों में ज़्यादा है शराब से
और जल्वे कमाल, ला-जवाब से
मैंने सुना है, वो आए हैं पंजाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
हमें चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
कोई बच नहीं पाएगा शबाब से
आज आए हैं हुज़ूर बे-नक़ाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
हो, चलो, सीख लें इशारों का मुहावरा
है निगाहों का ही तो ये सारा माजरा
"क्या दिलावरी दिखाएँगे, मिसाल दो"
लोग पूछते हैं, आ के तो बता ज़रा
आ, जिसे जामिया-ए-इश्क़ से तालीम हो
वो जो शोर-ओ-ग़ुल से दूर हो, सलीम हो
वो ही उल्फ़तें सिखाएँगे हिसाब से
वो ही उल्फ़तें सिखाएँगे हिसाब से
'सरताज', क्या पढ़ोगे ये किताब से?
जज़्बात हैं दिलों में ये बेताब से
गुज़ारिशों पे-, गुज़ारिशों पे...
हमें चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
हमें चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
कोई बच नहीं पाएगा शबाब से
आज आए हैं हुज़ूर बे-नक़ाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
बात हुई है बहारों की गुलाब से
हुई है बहारों की गुलाब से
वाक़फ़ियतें भी हो गईं शादाब से
वो तो माँगते हैं शोख़ियाँ जनाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए (गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए)
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए (गुज़ारिशों पे)
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए (ग़ौर)
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए (कीजिए, हाँ)
नूर का ये शामियाना ख़ूब है, नायाब है
नाज़नीं ने रूह को नज़रों से रौशन कर दिया
मेहरबानी शुक्रिया, तस्लीम है, आदाब है
ख़्वाब-गाहों से हो चुकी है रवानगी
अभी बादलों पे छाएगी दीवानगी
ख़्वाब-गाहों से हो चुकी है रवानगी
अभी बादलों पे छाएगी दीवानगी
हमें चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
कोई बच नहीं पाएगा शबाब से
आज आए हैं हुज़ूर बे-नक़ाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
बात हुई है बहारों की गुलाब से
वाक़फ़ियतें भी हो गईं शादाब से
वो तो माँगते हैं शोख़ियाँ जनाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
आशिक़ाना सा मिज़ाज है अदाओं में
वो मिलाएँगे सुरूर भी फ़िज़ाओं में
आशिक़ाना सा मिज़ाज है अदाओं में
वो मिलाएँगे सुरूर भी फ़िज़ाओं में
वो मिलाएँगे सुरूर भी फ़िज़ाओं में
कि नशा अखियों में ज़्यादा है शराब से
अखियों में ज़्यादा है शराब से
और जल्वे कमाल, ला-जवाब से
मैंने सुना है, वो आए हैं पंजाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
हमें चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
कोई बच नहीं पाएगा शबाब से
आज आए हैं हुज़ूर बे-नक़ाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
हो, चलो, सीख लें इशारों का मुहावरा
है निगाहों का ही तो ये सारा माजरा
"क्या दिलावरी दिखाएँगे, मिसाल दो"
लोग पूछते हैं, आ के तो बता ज़रा
आ, जिसे जामिया-ए-इश्क़ से तालीम हो
वो जो शोर-ओ-ग़ुल से दूर हो, सलीम हो
वो ही उल्फ़तें सिखाएँगे हिसाब से
वो ही उल्फ़तें सिखाएँगे हिसाब से
'सरताज', क्या पढ़ोगे ये किताब से?
जज़्बात हैं दिलों में ये बेताब से
गुज़ारिशों पे-, गुज़ारिशों पे...
हमें चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
हमें चिट्ठियाँ मिली हैं माहताब से
कोई बच नहीं पाएगा शबाब से
आज आए हैं हुज़ूर बे-नक़ाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
बात हुई है बहारों की गुलाब से
हुई है बहारों की गुलाब से
वाक़फ़ियतें भी हो गईं शादाब से
वो तो माँगते हैं शोख़ियाँ जनाब से
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए (गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए)
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए (गुज़ारिशों पे)
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए (ग़ौर)
गुज़ारिशों पे ग़ौर कीजिए (कीजिए, हाँ)